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वैशाली में उत्पाद विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल, पुलिस ने 10 मिनट बाद बरामद की 11 कार्टन शराब

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वैशाली के बेलसर थाना क्षेत्र में उत्पाद विभाग की छापेमारी के बाद पुलिस ने उसी घर से 11 कार्टन विदेशी शराब बरामद की। घटना के बाद विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

वैशाली/आलम की खबर:बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब कारोबार लगातार प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकार और प्रशासन समय-समय पर शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के दावे करते रहे हैं, लेकिन वैशाली जिले से सामने आई एक घटना ने उत्पाद विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेलसर थाना क्षेत्र के मौना गांव में हुई छापेमारी अब इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है, क्योंकि उत्पाद विभाग की टीम जिस जगह से खाली हाथ लौट गई, उसी स्थान से कुछ ही मिनट बाद पुलिस ने भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद कर ली।

घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जिस घर में बाद में 11 कार्टन विदेशी शराब मिली, वहां उत्पाद विभाग की टीम को कुछ भी क्यों नहीं दिखाई दिया। इस पूरे मामले ने शराबबंदी कानून की निगरानी व्यवस्था और विभागीय कार्रवाई की पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।

जानकारी के अनुसार पुलिस और उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि मौना गांव के एक घर में बड़ी मात्रा में विदेशी शराब छिपाकर रखी गई है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए सबसे पहले उत्पाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने संबंधित घर में काफी देर तक तलाशी अभियान चलाया। आसपास के लोगों के मुताबिक टीम ने घर के कई हिस्सों की जांच की, लेकिन उन्हें कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला। काफी देर तक जांच के बाद उत्पाद विभाग की टीम बिना किसी बरामदगी के वहां से लौट गई।

लेकिन इसके बाद घटनाक्रम अचानक बदल गया। उत्पाद विभाग के लौटने के लगभग दस मिनट बाद बेलसर थाना पुलिस उसी घर में पहुंची और दोबारा तलाशी शुरू की। पुलिस की कार्रवाई के दौरान घर से 11 कार्टन विदेशी शराब बरामद की गई। इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और लोग घटनास्थल के आसपास जमा होने लगे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों छापेमारी के बीच बहुत कम समय का अंतर था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब पुलिस को उसी जगह से शराब मिल गई तो उत्पाद विभाग की टीम को क्यों नहीं मिली। कुछ लोगों ने इसे लापरवाही बताया, जबकि कुछ लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। गांव में यह चर्चा भी तेज है कि अगर पुलिस दोबारा छापेमारी नहीं करती तो शराब की इतनी बड़ी खेप का खुलासा शायद नहीं हो पाता।

पुलिस अधिकारियों ने शराब बरामद होने की पुष्टि की है। हालांकि इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई की भनक लगते ही शराब कारोबारी मौके से फरार हो गए। पुलिस अब फरार आरोपियों की पहचान करने और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब कहां से लाई गई थी और इसे किन इलाकों में सप्लाई किया जाना था।

घटना के बाद उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। आम लोगों का कहना है कि यदि सूचना पहले से मौजूद थी और तलाशी अभियान चलाया गया था, तो इतनी बड़ी मात्रा में शराब का छिपा रह जाना गंभीर मामला है। कुछ लोगों का कहना है कि मामले में विभागीय जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

बिहार में वर्ष 2016 से शराबबंदी कानून लागू है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar की सरकार लगातार दावा करती रही है कि शराबबंदी से सामाजिक सुधार हुआ है और अपराध में कमी आई है। लेकिन दूसरी ओर राज्य के अलग-अलग जिलों से लगातार शराब बरामद होने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई बार पुलिस और उत्पाद विभाग की कार्रवाई पर सवाल भी उठते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी लागू होने के बाद अवैध शराब कारोबार का नेटवर्क और ज्यादा संगठित हो गया है। सीमावर्ती जिलों और ग्रामीण इलाकों में शराब की तस्करी रोकना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि शराब कारोबारी गुप्त तरीके से नेटवर्क चलाते हैं और प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना पहले ही उन्हें मिल जाती है।

वैशाली की यह घटना अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन सकती है। विपक्ष पहले भी शराबबंदी कानून को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है। अब इस मामले को लेकर प्रशासन की जवाबदेही और विभागीय समन्वय पर भी बहस शुरू हो गई है।

स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच ईमानदारी से की जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। लोगों का मानना है कि शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए केवल कार्रवाई के दावे काफी नहीं हैं, बल्कि विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। बरामद शराब को जब्त कर लिया गया है और उससे जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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